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शब्दस अर्थुक सन्ग्यान कऽम्य दियुत, |
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Written by jaya
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Tuesday, 09 October 2007 00:22 |
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from the pages of Jaya, written in 2005 शब्दस अर्थुक सन्ग्यान कऽम्य दियुत, येलि ज़ीवस दीवस सुत्य म्युल गव। शब्दन वो॒ठ तुज आगुर म्युलुस, शिव रूप मन्त्र ततिथुय रलिथ गव। मन्त्र तम्यसुन्द येलि कीवल ॐ बन्यव, शरीरुक आकार तथिय व्यगलिथ गव। भूत भविष्यस येम्य दुनुन्य दिच, तवै वर्तमानस मन्ज़ सुय लय गव।
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