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Written by Dr. Chaman Lal Raina
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Saturday, 17 November 2007 00:39 |
शब्द टूट गये विचार बूढे हो गये भावनाएं बिखर गयी कल्पनाएं रूठ गयीअब कविता कैसे बनेगीइसी का नाम वृद्धावस्था है पहले बनता था एक स्फारउन्मेष से उद्भासित होते थे उद्गार स्फुर्ति से आते थे विचारशब्दों को मिलता था आकारइधर से उदर विचरते थे मनोभाव रचनात्मक होते थे काव्यप्राणों में स्पन्दित होता था श्वासबनता था एक वास्तविक शब्द-विन्यासउसी में होता था मेरा यौगिक उल्लास क्रियात्मक भावों से करते थे सृजनशब्द रचना का होता था विमोचन यह सब विस्मृत हुआविस्थापन में ही वृद्धा आ गयी।
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Last Updated on Saturday, 16 August 2008 14:19 |